हमें गर्व है हम भारतीय हैं और हम सम्मनित है कि इस देश की माटी ने हमें ये मौका ये धरना दी की इस माटी के खेल “खेल पिट्ठू” जिसकी कोई मान्यता नहीं है उसको राष्ट्रिय ही नहीं अंतर राष्ट्रिय खेल की मानता मिले
प्राचीन काल से ही भारत में खेल की एक समृद्ध परम्परा रही है! आदिकाल से ही खेल हमारे जीवन का एक अद्भुत पूर्ण अंग रहा है! अपना भारत वर्ष जो की बहुत से खेलो की जननी मानी जाती है, आज भी स्वदेशी खेलो की कोई मानता नहीं जिस जगह पर उन्हें होना चाहिए! अगर हम प्राचीनतम खेल की बात करें तो उनमें से एक अहम खेल पिट्ठू भी है! माना जाता है खेल पिट्ठू एक ऐसा खेल है जो द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी जी द्वारा खेला जा चूका है!
अब इस खेल पिट्ठू में जो रूपान्तर किया गया है वो हमारे संस्कृति के साथ आधुनिकता को दर्शाता है जो कि एक पहल है नये भारत की और! “गेम पिट्ठू स्पोर्ट्स फेडरेशन” जिसका खेल पिट्ठू एक अदवितीय खेल है! जिसका एक अभूतपूर्ण लक्ष्य, दृष्टिकोन व उदेश्य है!
खेल पिट्ठू एक मध्यम बन रहा है जिसे ग्रामीण शेत्र का विकास ही नहीं बल्की उसकी प्रतिभा को प्रकाशित करना है! इन सब के साथ-साथ महिला सामंत, सुशक्तिकरण और बहुत रोजगार के अवसर प्रदान करना भी है! खेल पिट्ठू के नियम के पालन से खिलाड़ियों में समन्वय, धैर्य, सहस, सामुहिक सद्भाव और भाईचारे की भावना बढ़ती है! खेल पिट्ठू हमारे शरीर को ताशकन्द और मन को प्रसन्न, उत्साहित बनाये रखाता है!
खेल पिट्ठू संसार में भारतीय पारम्परिक खेलो को अब एक नयी छोटी पर पहुंचाएगी! जो फर्क अब तक आदमी और औरत के बीच खासकर खेलों में रखा हुआ है, खेल पिट्ठू वह दूर करेगी! इक खेलने का साधन ही नहीं बल्कि बहुत सारे रोजगारो के अवसर खोलेगी! खेल पिट्ठू भारतीयी मिटटी की पहली गेम होगी जोह विदेशियों को भारतीयी मिट्ठी का स्वाद देगी!
आओ खेल पिट्ठू खेले एक नये अवतार में


