Asian Games 2026: मजबूत नीतियां, उभरती प्रतिभाएं और विश्व खेल-शक्ति बनने की दिशा में भारत का आत्मविश्वासी अभियान
एशियाई खेल 2026: भारत की खेल-क्रांति का अगला निर्णायक पड़ाव
डॉ. पीयूष जैन: राष्ट्रीय सचिव, फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PEFI)
आज से जापान के आइची-नागोया में एशियाई खेल 2026 का आगाज हो रहा है, खेलों का यह दूसरा सबसे बडा आयोजन 4 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमे भारत 503 खिलाड़ियों के दल के साथ भाग ले रहा है इस उम्मीद के साथ कि वह अपना अब तक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगा।
यह एशियाई खेल भारत के खेल सफर का एक महत्वपूर्ण और निर्णायक पड़ाव हैं। यह आयोजन केवल पदक जीतने की प्रतिस्पर्धा नहीं है, बल्कि हमारे पूरे स्पोर्ट्स इकोसिस्टम खिलाड़ी की तैयारी, कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस, टैलेंट आइडेंटिफिकेशन, न्यूट्रिशन, इंजरी मैनेजमेंट और राष्ट्रीय खेल नीति की क्षमता का वास्तविक आकलन भी है।
भारत के लिए यह अभियान केवल पदक तालिका में बेहतर स्थान बनाने का प्रयास नहीं है, बल्कि एशिया की अग्रणी खेल शक्तियों के सामने यह साबित करने का अवसर है कि भारतीय खिलाड़ी अब निरंतरता, आत्मविश्वास और उच्च-स्तरीय प्रदर्शन के साथ विश्व मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं।
भारत इन खेलों में अपने अब तक के सर्वश्रेष्ठ एशियाई खेल प्रदर्शन की मजबूत पृष्ठभूमि के साथ प्रवेश कर रहा है। हांगझोउ एशियाई खेल 2023 में भारत ने 28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य सहित रिकॉर्ड 107 पदक जीते थे। यह पहली बार था जब भारत एशियाई खेलों में 100 पदकों के पार पहुंचा। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के अलावा 100 से अधिक पदक जीतने वाला पहला देश भी बना।
अब आइची-नागोया में सबसे बड़ी चुनौती इस उपलब्धि को दोहराने या उससे आगे बढ़ने की है। इसलिए 2026 का अभियान भारतीय खेलों की निरंतरता और गहराई की परीक्षा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व एवं खेल मंत्री मनसुख मंडावीया के कुशल क्रियान्वयन में पिछले वर्षों में खेलों को केवल मनोरंजन या कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों की उपलब्धि के रूप में नहीं देखा गया है। खेल अब युवा विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक समावेशन, अर्थव्यवस्था और राष्ट्र-निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं।
इस सोच ने केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, राष्ट्रीय खेल महासंघों, भारतीय खेल प्राधिकरण, स्कूलों, विश्वविद्यालयों, प्रशिक्षकों, खेल-विज्ञान विशेषज्ञों, कॉरपोरेट क्षेत्र और अभिभावकों को एक साझा लक्ष्य से जोड़ा है।
आज भारत के छोटे शहरों, सीमावर्ती क्षेत्रों, गांवों और जनजातीय समुदायों से खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रहे हैं। अनेक खिलाड़ियों की यात्रा साधारण मैदानों, सीमित साधनों और स्थानीय प्रशिक्षकों से शुरू हुई है।
यह बदलाव बताता है कि भारतीय खेल अब कुछ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहे। मिजोरम की हॉकी खिलाड़ी लालरेमसियामी की साधारण पृष्ठभूमि से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक की यात्रा इस बदलते भारत की प्रेरक तस्वीर प्रस्तुत करती है।
ऐसी कहानियां केवल व्यक्तिगत संघर्ष की नहीं, बल्कि उस संभावना की प्रतीक हैं जो सही अवसर मिलने पर देश के हर हिस्से में मौजूद है।
भारत के मौजूदा खेल अभियान की मजबूत नींव खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) और KIRTI जैसी पहलों ने तैयार की है। खेलो इंडिया ने जमीनी स्तर पर प्रतिभा खोज, प्रतियोगिता, प्रशिक्षण, आधारभूत ढांचे और खिलाड़ी सहायता की व्यापक व्यवस्था विकसित की है।
TOPS संभावित अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं को उनकी व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार विदेशी प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता, विशेष उपकरण, कोचिंग, चिकित्सा सहायता, पोषण और पुनर्वास उपलब्ध कराता है।
जुलाई 2026 तक देश में 1,067 खेलो इंडिया केंद्र, 267 समर्थित अकादमियां और 2,745 समर्थित खेलो इंडिया एथलीट थे। अप्रैल 2026 तक TOPS के अंतर्गत 51 कोर एथलीट, 52 पैरा कोर एथलीट और 130 डेवलपमेंट एथलीट सहयोग प्राप्त कर रहे थे।
2018 से अब तक 63,000 से अधिक खिलाड़ी विभिन्न खेलो इंडिया प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं। ये आंकड़े केवल योजनाओं का विस्तार नहीं दिखाते; वे उस खिलाड़ी-पथ की ओर संकेत करते हैं जो स्थानीय प्रतियोगिता से राष्ट्रीय शिविर और फिर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकता है।
KIRTI कार्यक्रम 9 से 18 वर्ष के बच्चों में खेल प्रतिभा पहचानने के लिए मानकीकृत परीक्षण, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विश्लेषण का उपयोग कर रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार 174 प्रतिभा मूल्यांकन केंद्रों पर 1.87 लाख से अधिक आकलन किए जा चुके हैं।
यह महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता तब बढ़ेगी जब स्कूलों के शारीरिक शिक्षा शिक्षकों को भी प्रतिभा पहचान की राष्ट्रीय प्रणाली से औपचारिक रूप से जोड़ा जाएगा।
PE शिक्षक रोज बच्चों के बीच रहते हैं और उनकी गति, संतुलन, सहनशक्ति, खेल रुचि, अनुशासन तथा सीखने की क्षमता को लगातार देख सकते हैं। इसलिए उन्हें केवल खेल प्रतियोगिता आयोजित करने वाला कर्मचारी नहीं, बल्कि स्कूल स्तर का प्रतिभा पहचान प्रमुख बनाया जाना चाहिए।
नई राष्ट्रीय खेल नीति 2025, अर्थात खेलो भारत नीति, का उद्देश्य भारत में खेलों को अधिक मजबूत, समावेशी और परिणाम-केंद्रित बनाना है। इस नीति की मुख्य सोच है कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, स्वस्थ समाज, युवा विकास और रोजगार के अवसरों का भी महत्वपूर्ण आधार हैं। इसमें खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने, अधिक लोगों को खेलों से जोड़ने, शिक्षा और खेल के बीच बेहतर तालमेल बनाने, खेल उद्योग को बढ़ावा देने तथा युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करने पर जोर दिया गया है।
लेकिन इस नीति की असली सफलता तभी होगी, जब इसका लाभ हर स्कूल, गांव और समुदाय तक पहुंचे। स्कूलों में अच्छी शारीरिक शिक्षा, प्रशिक्षित पीई शिक्षक, सुरक्षित खेल मैदान, लड़कियों के लिए समान अवसर, दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं, स्थानीय खेलों का संरक्षण और लोगों को फिटनेस से जोड़ने वाले कार्यक्रम जरूरी हैं। जब खेल की यह व्यवस्था जमीनी स्तर तक मजबूत होगी, तभी भारत वास्तव में एक मजबूत और सफल खेल राष्ट्र बन सकेगा।
खेल प्रशासन में सुधार भी भारत की अंतरराष्ट्रीय महत्वाकांक्षा का जरूरी आधार है। राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 खेल संस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही, निष्पक्ष चुनाव, खिलाड़ी प्रतिनिधित्व और बेहतर विवाद निवारण के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है। यदि इसके प्रावधान ईमानदारी और समानता से लागू होते हैं, तो खिलाड़ियों का चयन, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, प्रतियोगिता अवसर और शिकायत निवारण अधिक भरोसेमंद बन सकता है।
अच्छे खिलाड़ी तैयार करने के लिए अच्छे प्रशिक्षक और खेल-विज्ञान सेवाएं जितनी आवश्यक हैं, उतना ही आवश्यक साफ और खिलाड़ी-केंद्रित प्रशासन भी है।
भारत को अपने अभियान के दौरान स्वच्छ खेल और एंटी-डोपिंग शिक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। हाल के कुछ डोपिंग मामलों ने यह स्पष्ट किया है कि केवल पदक की चाह पर्याप्त नहीं है; पदक तक पहुंचने का रास्ता भी सुरक्षित, नैतिक और नियमों के अनुरूप होना चाहिए। खिलाड़ी, प्रशिक्षक, चिकित्सक, पोषण विशेषज्ञ और सहयोगी स्टाफ—सभी को प्रतिबंधित पदार्थों, सप्लीमेंट के जोखिम, उपचार संबंधी छूट और परीक्षण प्रक्रिया की सही जानकारी होनी चाहिए। डोपिंग का एक मामला केवल खिलाड़ी का करियर नहीं रोकता, बल्कि टीम, खेल और देश की प्रतिष्ठा को भी प्रभावित करता है।
एशियाई खेलों का परिणाम भारत के अगले ओलंपिक चक्र और Vision 2036 के लिए महत्वपूर्ण संकेत देगा। यह प्रतियोगिता बताएगी कि भारत कितने खेलों में पदक का वास्तविक दावेदार बन चुका है, किन खेलों में प्रदर्शन की निरंतरता है और किन क्षेत्रों में अभी तत्काल सुधार की जरूरत है।
यह खिलाड़ियों की मानसिक तैयारी, दबाव में प्रदर्शन, टीम संयोजन, चोट प्रबंधन, खेल-विज्ञान सेवाओं, कोचिंग गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय रणनीति की व्यापक समीक्षा का अवसर भी होगा।
हमारा लक्ष्य केवल आइची-नागोया में सफल अभियान चलाना नहीं, बल्कि 2036 और उसके बाद के लिए एक स्थायी खेल राष्ट्र बनाना है। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय में नियमित और गुणवत्तापूर्ण शारीरिक शिक्षा, कक्षा I से XII तक सुरक्षित खेल अवधि, प्रशिक्षित PE शिक्षक, स्थानीय मैदान, वैज्ञानिक कोचिंग, महिला एवं पैरा खिलाड़ियों को समान अवसर, मजबूत विश्वविद्यालय खेल व्यवस्था, स्वच्छ खेल शिक्षा और पारदर्शी महासंघ जरूरी हैं।
भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन केवल बड़ी योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं होगा। यदि नीति, संसाधन, सुशासन, खेल-विज्ञान और जमीनी प्रतिभा एक दिशा में आगे बढ़ते रहे, तो आइची-नागोया 2026 भारत के लिए केवल पदक जीतने का मंच नहीं रहेगा।
यह उस नए भारत की घोषणा बन सकता है जो बड़े लक्ष्य तय करता है, वैज्ञानिक तैयारी करता है, अपनी युवा शक्ति पर विश्वास करता है और विश्व की अग्रणी खेल शक्तियों में स्थान बनाने के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।


