“बिहार मेरी प्राथमिकता, 2030 में विधानसभा चुनाव लड़ूंगा” – चिराग पासवान

“बिहार मेरी प्राथमिकता, 2030 में विधानसभा चुनाव लड़ूंगा” – चिराग पासवान

नई दिल्ली। टाइम्स नाउ समिट 2025 में वक्ता के रूप में मौजूद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अपने साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक यात्रा का मुख्य उद्देश्य बिहार की सेवा करना है

उन्होंने कहा कि भले ही वे वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री हैं, लेकिन उनका लक्ष्य अपने राज्य बिहार में सक्रिय भूमिका निभाना है।

“मुख्यमंत्री बनने का फैसला भविष्य पर निर्भर करेगा, लेकिन यह तय है कि 2030 में मैं बिहार विधानसभा चुनाव जरूर लड़ूंगा,” चिराग ने आत्मविश्वास से कहा। उन्होंने जोर दिया कि उनकी राजनीति की नींव ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ के सिद्धांत पर टिकी है और वे अपने राज्य की बेहतरी के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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केंद्र की राजनीति में अधिक समय नहीं बिताना चाहता

चिराग पासवान ने यह भी स्वीकार किया कि उनके दिवंगत पिता, रामविलास पासवान की प्राथमिकता हमेशा केंद्र की राजनीति रही, लेकिन उनकी खुद की सोच इससे भिन्न है। उन्होंने कहा, “पापा केंद्र की राजनीति में रहना चाहते थे, लेकिन मेरी प्राथमिकता बिहार है। मैं ज्यादा समय तक केंद्र में नहीं रहना चाहता। मेरा प्रदेश मुझे बुला रहा है।”

‘मौसम विज्ञान’ और प्रशांत किशोर पर चिराग की प्रतिक्रिया

अपने पिता को ‘राजनीतिक मौसम वैज्ञानिक’ कहे जाने पर चिराग ने मुस्कुराते हुए कहा, “उनका खून मेरी रगों में है, उनके संस्कार मेरे अंदर हैं। मछली के बच्चे को तैरना नहीं सिखाया जाता, मुझे राजनीति का मौसम विज्ञान समझने में ज्यादा समय नहीं लगता।” प्रशांत किशोर की राजनीतिक संभावनाओं पर उन्होंने कूटनीतिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “पहले उन्हें टेक-ऑफ करने दीजिए, फिर देखेंगे कि उनकी फ्लाइट सुरक्षित लैंडिंग करती है या किसी टर्बुलेंस का शिकार होती है।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्रशांत किशोर उनके अच्छे मित्र हैं और विधानसभा चुनाव में उनकी रणनीति को लेकर स्पष्टता आ जाएगी।

खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की बड़ी जिम्मेदारी

केंद्रीय मंत्री के रूप में अपने अनुभव पर बात करते हुए चिराग ने कहा कि उन्हें जिस विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह बिहार के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। “मैंने हमेशा बिहार की कृषि संपदा को महत्व दिया है। मुजफ्फरपुर की लीची, भागलपुर का आम, हाजीपुर का केला – इन सबके लिए प्रोसेसिंग यूनिट जरूरी हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने बताया कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वे लगभग 250 मिलियन डॉलर का निवेश भारत में लाने में सफल रहे। साथ ही, बिहार में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFTEM) खोलने की घोषणा को उन्होंने राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।

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“बिहार लौटूंगा, अपनी लकीर लंबी करूंगा”

भविष्य की राजनीति पर सवाल पूछे जाने पर चिराग ने कहा, “मैं किसी की लकीर को काटने में विश्वास नहीं रखता, बल्कि अपनी लकीर को लंबा करना चाहता हूँ।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “चिराग की लौ बुझने वाली नहीं, यह कई घरों को रोशन करेगी। बिहार मेरा सपना है और मैं इसे जरूर साकार करूंगा।”

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